केदारनाथ में तेजी से चल रहा शंकराचार्य समाधि स्थल का कार्य

केदारनाथ में तेजी से चल रहा शंकराचार्य समाधि स्थल का कार्य
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हरेन्द्र नेगी

दिसम्बर अंत तक बनकर तैयार हो जायेगा समाधि स्थल
अब तक 35 प्रतिशन कार्य हो चुका है पूरा
समाधि स्थल की भव्यवता को लेकर लगाए जा रहे दस हजार कटुआ पत्थर
अगले वर्ष श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केन्द्र रहेगा समाधि स्थल
रुद्रप्रयाग। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल आदि गुरू शंकराचार्य की समाधि स्थल का कार्य केदारनाथ धाम में जोरों पर चल रहा है। बताया जा रहा है कि दिसम्बर 2020 तक यह कार्य पूरा हो जायेगा और अगले वर्ष की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह आकर्षण का केन्द्र रहेगा। समाधि स्थल को भव्यता प्रदान करने को लेकर वुड स्टोन की कंपनी रात दिन एक किए हुए हैए जिससे समाधि स्थल के अलग स्वरूप में नजर आए।
बता दें कि वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा के समय आदि गुरू शंकराचार्य की समाधि स्थल तबाह हो गयी थी। इसके बाद समाधि स्थल निर्माण की मांग उठने लगी और पिछले वर्ष देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में इसे शामिल किया गया। समाधि स्थल का कार्य केदारनाथ धाम में तेजी से चल रहा है। इन दिनों धाम में मौसम भी काफी अच्छा हैए जिसका फायदा वुड स्टोन कंपनी उठा रही है और निर्माण कार्य को तेजी से कर रही है। समाधि स्थल पर दूसरे चरण का कार्य चल रहा है और इसकी भव्यवता का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। अब तक 35 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और मौसम ने साथ दिया तो बाकी कार्य दिसम्बर अंत तक समाप्त होने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल केदारनाथ पुनर्निर्माण में आदिगुरू शंकराचार्य के समाधि स्थल को भव्य और दिव्य बनाया जायेगा। समाधि स्थल तक पहुंचने और वहां से बाहर निकलने के लिए अलग.अलग रास्ते बनाए जायेंगे। प्रवेश के लिए दिव्य शिला से होते हुए 65 मीटर लंबा रास्ता बनेगा। रास्ते के अंतिम छोर पर घुमावदार रैंप बनेगीए जिसके दो चक्कर लगाकर समाधि तक पहुंचा जा सकेगा। समाधि से बाहर आने के लिए दूसरी तरफ से रैंप के दो चक्कर लगाकर श्रद्धालु भैरवनाथ मंदिर की तरफ वाले रास्ते पर पहुंचेंगे। दोनों रास्तों पर दस हजार पठाल बिछाई जाएंगी। साथ ही निश्चित दूरी पर कटुआ पत्थर भी लगाए जाएंगेए जिसमें आदिगुरू शंकराचार्य से जुड़ी जानकारी व श्लोक लिखे होंगे। दो फीट लंबे व एक फीट चैड़ाई वाले पत्थरों को सरस्वती नदी के किनारे बड़े बोल्डरों से तैयार किया जा रहा है। पिछले चार माह से राजस्थान के मजदूरों के साथ स्थानीय कारीगर भी बोल्डरों से कटुआ पत्थर तैयार करने में जुटे हुए हैं।
वुड स्टोन कंस्ट्रक्शन कंपनी केदारनाथ के मैनेजर सोबन सिंह ने बताया कि शंकराचार्य समाधि स्थल का कार्य तेजी से चल रहा है। केदारनाथ मंदिर से 65 मीटर पीछे समाधिस्थल का निर्माण हो रहा है। यह कार्य 35 प्रतिशन पूरा हो चुका है और अभी दूसरे चरण का कार्य चल रहा है। शंकराचार्य समाधि स्थल का लेवल आठ मीटर नीचे है तो पांच मीटर ऊपर उठेगा। आदिगुरू शंकराचार्य के समाधिस्थल के प्रवेश व निकासी मार्ग पर दस हजार हजार कटवा पत्थर बिछाए जाने हैंए जिससे इसकी सुंदरता और बढ़ जाएगी। तीसरे चरण में सौंदर्यीकरण के तहत इन पत्थरों को बिछाया जाना है। अभी तक सात हजार पत्थर तैयार हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि दिसम्बर अंत तक यह कार्य पूरा हो जायेगा और अगले वर्ष तीर्थयात्रियों के लिए समाधि स्थल आकर्षण का केन्द्र रहेगा।

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