कोविड 19 ने सुनने या बोलने की अक्षमता वाले लोगों को किया अलग थलग

कोविड 19 ने सुनने या बोलने की अक्षमता वाले लोगों को किया अलग थलग
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कोविड 19 ने सुनने या बोलने की अक्षमता वाले लोगों को किया अलग थलग

अलग-अलग विकलांगों की जरूरतों को अलग अलग तरीकों के रूप में पूरा किया जाता है लेकिन महामारी के दौर में समस्या कई गुना बढ़ गई है।

सुनने या बोलने की अक्षमता वाले लोग संवाद करने के लिए होंठों की रीडिंग, बॉडी लैंग्वेज, हावभाव और चेहरे के भावों पर भरोसा करते हैं, लेकिन अब यह स्थिति है कि कोविड -19 महामारी के दौरान हर कोई मास्क पहने हुए है, जो एक बड़ी बाधा साबित हो रहा है और पहले से ही हाशिए पर पड़े लोगों को और भी अलग थलग कर दिया गया है।

ऐसे में दिक्कत से सुनने या बोलने की अक्षमता वाले लोगों के दैनिक कार्यों को पूरा करने होने में दिक्कत हो रही है। किराने की दुकानों से लेकर अस्पतालों आदि रोज़मर्रा के काम पढ़ने वाली जगहों जहां लोगों से सामना होता है वहां इनको चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उदाहरण के लिए दुकानदार से बिल मांगना इनके लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है क्योंकि उन्हें दुकानदार को राशि लिखने और उसे दिखाने की आवश्यकता हो सकती है।

महामारी के दौरान विकलांग महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर एक रिपोर्ट के अनुसार 82 प्रतिभागियों में से 75 जिनकी बधीर, बधीर-नेत्रहीन, सुनने में कठिनाई होने वालों में पहचान की गई उनको सूचना, भौतिक रिक्त स्थान, संचार, लाइव के संबंध में अवरोधों का सामना किया। साथ ही साथी महामारी के दौरान डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं, भोजन और अन्य आवश्यक चीजें और डिजिटल शिक्षा लेने में दिक्कतें हुई।

विकलांग लोगों के संरक्षण और संवर्धन के लिए काम करने वाली एक एनजीओ का कहना है कि लिप रीडिंग पर भरोसा करने वालों को मास्क का व्यापक और आवश्यक उपयोग करना पड़ा जिससे उनको सेवाओं में दिक्कत हुई।

दिल्ली के 64 वर्षीय बुजुर्ग अमीचंद ने कहा,
मास्क के साथ, होंठ पढ़ना मुश्किल है, सब्जियों की खरीद के लिए बड़ी मुश्किल से इशारों से समझ पड़ता है। कई बार गलतफहमी हो जाती है। यह पहली बार है जब मैंने कुछ इस तरह का सामना किया है। मैं किसी से भी नहीं पूछ सकता या यह भी नहीं समझ सकता कि वे मास्क के नीचे से क्या कह रहे हैं।

पारदर्शी फेस मास्क

लेकिन हालात सुधर रहे हैं, भले तेजी से ना हो। देहरादून स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर द एम्पावरमेंट ऑफ पर्सन्स विद विजुअल डिसएबिलिटीज (NIEPVD) ने पारदर्शी फेस मास्क बनाए और वितरित किए है।

संस्थान ने अब तक 800 मास्क बनाए हैं, और उनमें से 250 को पुलिसकर्मियों और बाकी के सदस्यों के बीच उनके परिसर में वितरित किए है।

तमिलनाडु सरकार ने भी समस्या का संज्ञान लिया है और पारदर्शी मास्क बनाने के लिए स्थानीय निर्माताओं के साथ भागीदारी की है। एक पायलट परियोजना के हिस्से के रूप में, सरकार ने लगभग 13,500 लोगों, उनके परिवारों और दोस्तों को 81,000 मास्क वितरित करने की योजना बनाई है।

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