जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग के संगम स्थित 67 मीटर सुरंग का होगा ट्रीटमेंट

जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग के संगम स्थित 67 मीटर सुरंग का होगा ट्रीटमेंट
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harndra negi
1960 में हुआ था सुरंग का निर्माण, एक सप्ताह के भीतर शुरू हो जायेगा कार्य
45 दिन के लिये यातायात व्यवस्था दूसरे रूट से होगी संचालित
20 लाख की लागत से होगा जर्जर सुरंग का ट्रीटमेंट
सुरंग के ट्रीटमंेट को लेकर बुलाई गई है जियोलाॅजिकल की टीम
सुरंग के ट्रीटमेंट में लोहे की जाली के जरिये होगा अस्थाई समाधान
रुद्रप्रयाग। आखिरकार प्रशासन और एनएच के अधिकारी जाग गये हैं। लंबे अरसे के बाद केदारनाथ हाईवे पर संगम बाजार स्थित सुरंग का ट्रीटमेंट होने जा रहा है। उम्मीद है कि एक सप्ताह बाद हाईवे पर स्थित सुरंग का ट्रीटमेंट शुरू हो जायेगा। इसके लिए जियोलाॅजिकल की टीम को भी बुलाया गया है, जो सुरंग के ट्रीटमेंट को सही तरीके से करने के सुझाव देगी। सुरंग के ट्रीटमेंट को लेकर एनएच विभाग ने 45 दिन के लिये सुरंग से यातायात को रोकने की अनुमति मांगी है। एक सप्ताह के भीतर सुरंग का ट्रीटमेंट का कार्य शुरू हो जायेगा, जिस पर लगभग बीस लाख की धनराशि खर्च होगी।
दरअसल, जिला मुख्यालय में साठ के दशक में गौरीकुंड हाईवे पर केदारघाटी और केदारनाथ धाम को जोड़ने के लिए सुंरग का निर्माण किया गया था। वर्ष 1960 में 67 मीटर सुरंग का निर्माण किया गया था। देख रेख के अभाव में सुरंग जर्जर स्थिति में है। सुरंग दोनों ओर से कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो चुकी है। सुरंग पर लगाई गई सीमेंट की ईटें भी टूट रही हैं, जिससे यहां से गुजरने वाले वाहनों को हर समय खतरा बना रहता है। सुरंग भीतर से कई स्थानों पर खोखली हो चुकी है। सुरंग के भीतर से पत्थर एवं ईंट गिरते रहते हैं। जिस कारण दुर्घटना का खतरा बना रहता है। सुरंग के भीतर जहां लोग चोटिल हो चुके हैं, वहीं कई वाहन भी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इसके अलावा सुरंग के भीतर सड़क का डामर पूरी तरह उखड़ चुका है। बारिश होने पर सुरंग तालाब में तब्दील हो जाती है। जुगाड़बाजी में तो कई बार सुरंग का ट्रीटमेंट किया गया, लेकिन यह कामगार नहीं हो पाया।
अब प्रशासन और एनएच ने आखिरकार सुरंग की जर्जर हालात की सुध ली है। एनएच की ओर से सुरंग के ट्रीटमेंट के लिये प्रशासन से 45 दिन के लिये सुरंग से यातायात व्यवस्था रोकने की मांग की गई है। सुरंग के ट्रीटमेंट को लेकर जियोलाॅजिकल टीम को भी बुलाया गया है, जो सही तरीके से ट्रीटमेंट करने के तरीके इंजीनियरों को देगी। पुराने समय में सुरंग पर लगे पत्थर को पहले नीचे गिराया जायेगा, जिसके बाद टीम उसका निरीक्षण करेगी। निरीक्षण करने के बाद सुरंग का कार्य शुरू होगा।
मामले में जिलाधिकारी वंदना सिंह ने कहा कि सुरंग के ट्रीटमेंट के लिये एनएच की डीपीआर को स्वीकृति मिल चुकी है। ट्रीटमेंट को लेकर एनएच से पूर्व में वार्ता भी की गई थी। सुरंग के ट्रीटमेंट न होने की लगातार शिकायतें मिल रही थी। एनएच ने कार्य करने के लिये 45 दिन के लिये यातायात व्यवस्था बाईपास से संचालित करने की अनुमति मांगी है। एक सप्ताह के भीतर सुरंग पर कार्य शुरू हो जायेगा।

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