पर्यटकों की नजर से औझल है प्रसिद्ध पर्यटक स्थल बधाणीताल

पर्यटकों की नजर से औझल है प्रसिद्ध पर्यटक स्थल बधाणीताल
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रुद्रप्रयाग। एक ओर प्रदेश सरकार पर्यटन क्षेत्रों को बढ़ावा देने और यहां के लोगों को रोजगार से जोड़ने की बात कर रही है, लेकिन कई पर्यटक स्थल ऐसे हैं, जो वर्षों से पर्यटन के क्षेत्र में पहचान नहीं बना पाये हैं। हालांकि कुछ गिने-चुने पर्यटक यहां आते तो हैं, लेकिन उन्हे असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। यही हाल रुद्रप्रयाग जनपद के प्रसिद्ध पर्यटक स्थल बधाणीताल के भी हैं। देख-रेख के अभाव में पर्यटक स्थल बधाणीताल धीरे-धीरे पर्यटकों की नजरों से औझल बना है। अगर सरकार इस क्षेत्र को विकसित करती है तो देश-विदेश से लौटे प्रवासियों के लिए यह क्षेत्र रोजगार का जरिया बन सकता है।
रुद्रप्रयाग जनपद के दूरस्थल क्षेत्र बधाणीताल गांव में बधाणीताल स्थित है। बधाणीताल गांव के बीच में स्थित इस ताल की खूबसूरती देखते ही बनती है। इस ताल में रंग-बिरंगी मछलियां पाई जाती हैं। इन मछलियों को कोई भी नहीं मारता है। यहां पर भगवान त्रियुगीनारायण का भव्य मंदिर भी विराजमान है। पौराणिक मान्यता के अनुसार शिव-पार्वती विवाह स्थल त्रियुगीनारायण से इस ताल में पानी निकलता है। यह ताल ऐसी जगह पर विराजमान है, जहां जून महीने में पड़ने वाली भीषण गर्मी में भी रजाई का सहारा लेना पड़ता है। ताल के चारों ओर खुली-खुली पहाड़ियां पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। वर्षभर यहां स्थानीय लोगों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में यह पर्यटन स्थल अपनी पहचान नहीं बना पाया है। आज तक इस ताल की गहराई को भी कोई नहीं नाप पाया है।
बधाणीताल की प्रशासन के अलावा सरकारों की ओर से सुध न लिये जाने के कारण यह ताल धीरे-धीरे जहां पर्यटकों की नजरों से दूर हो रहा है, वहीं यह खण्डहर भी बनता जा रहा है। प्रत्येक वर्ष बैसाखी पर यहां पर मेले का आयोजन किया जाता है। मेले में तमाम तरह की घोषणाएं ताल को लेकर की जाती हैं, लेकिन यह घोषणाएं धरातल पर नहीं उतर पाती हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर कई बड़े-बड़े मंत्री भी इस ताल को निहारने आ चुके हैं, लेकिन सबने मात्र घोषणा तक की है। ताल के चारो ओर ऊंची चारदिवारी का होना जरूरी है। जो दीवारे दी भी गई हैं, वह कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई हैं। जबकि ताल कई जगहों पर दलदल में भी तब्दील हो गया है।
यहां आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों का कहना कि यदि इस ताल का प्रचार-प्रसार होने से यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होती है तो स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

वहीं जिला पर्यटन अधिकारी का कहना है कि बधाणीताल पर्यटक स्थल को पर्यटन मानचित्र में लाने के प्रयास किये जा रहे हैं। जनपद मुख्यालय से काफी दूरी पर बधाणीताल है। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार इस स्थल का विकास किया जा रहा है। पर्यटन की दृष्टि से यह स्थल काफी महत्वपूर्ण है। देश-विदेश से लौटे प्रवासियों के लिए यह स्थल रोजगार का साधन बन सकता है।
बाइट – सुशील नौटियाल, जिला पर्यटन अधिकारी

रुद्रप्रयाग जिले के बधाणीताल की मान्यता –
देवभूमि उत्तराखण्ड के रुद्रप्रयाग जिले में बधाणीताल धार्मिंक मान्यताओं के साथ-साथ जैव विवधता को भी समेटे हुए है। बधाणीताल रुद्रप्रयाग जिले के जखोली ब्लाक के बांगर पट्टी में में स्थित है और इस ताल का नाम बधाणी गांव के नाम पर ही बधाणीताल रखा गया है। बधाणीताल समुद्र तल से 2100 मीटर की उंचाई पर स्थित है और धार्मिक मान्यता ये है कि यहाँ भगवान त्रिजुगीनारायण का सिद्ध स्थान है।
त्रिजुगीनारायण तीन शब्दों त्रि यानी तीन जुगी यानी युग और नारायण यानी भगवान विष्णु से मिलकर बना हुआ है। धार्मिंक मान्यता है कि भगवान शिव और माँ पार्वती का विवाह रुद्रप्रयाग जिले के ही त्रिजुगीनारयण स्थान पर हुआ था। इस विवाह में भगवान विष्णु ने विशेष योगदान देते हुए उनके भाई का दायित्व निभाया था और अपनी नाभि से जल धारा निकालकर वहां एक कुंड का निर्माण किया था और जो आज एक ताल बन चुका है। इसे ही वर्तमान में बधाणीताल के नाम से जाना जाता है। इस क्षेत्र के इर्द-गिर्द सुरम्य पहाड़ियां, हरी-भरी मखमली बुग्याल, रंग बिरंगी वन्य प्रजातियों के पुष्प और पक्षियों का कलरव सैलानियों व पर्यटकों को खूब भाता है।
जल संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देता है बधाणीताल
इस ताल की विशेषता ये है कि यह जल संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देता है और इस ताल में हिमालय में पायी जाने वाली अनेक प्रकार की मछलियाँ भी मिलती हैं, जो तरह-तरह के रंगों की पायी जाती हैं। इन मछलियों को न तो कोई पकड़ता है और न ही अन्य तरह का कोई नुकसान पहुँचता है। यहाँ मछलियों की सेवा भगवान त्रिजुगीनारायण की सेवा माना जाता है, इन्हें नुकसान पहुँचाना मतलब देवता को नुकसान पहुंचाना है।
कैसे पहुंचे-
दिल्ली या देहरादून से चलने पर ऋषिकेश से होते हुए रुद्रप्रयाग तक का सफर तयकरने के बाद फिर केदारनाथ मार्ग के मुख्य पड़ाव तिलवाड़ा तक पहुंचना होगा। तिलवाड़ा से जखोली ब्लाॅक के मुख्य पड़ाव मयाली होते हुए बधाणीताल तक का सफर वाहन से तय किया जा सकता है। ऋषिकेश से बधाणीताल की दूरी लगभग दो सौ किलोमीटर के आसपास है।

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