मलबे में दबे घाटों की सफाई के लिए नगर पालिका ने शासन से मांगे 60 लाख

मलबे में दबे घाटों की सफाई के लिए नगर पालिका ने शासन से मांगे 60 लाख
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harendra negi

मलबे में दबे घाटों की सफाई के लिए नगर पालिका ने शासन से मांगे 60 लाख
नमामि गंगे योजना के तहत बने घाटों की बरसात के बाद दयनीय स्थिति
पालिका ने घाटों की सफाई के लिये शासन को भेजा प्रस्ताव, पालिका के पास सफाई के लिये पैंसा नहीं
घाट मलबे एवं रेत के ढ़ेर में तब्दील, कोई भी पर्यटक और यात्री नहीं कर रहे हैं घाटों का रूख
बरसाती सीजन में जलमग्न हो जाते हैं घाट
रुद्रप्रयाग।  नमामि गंगे योजना के अंतर्गत अलकनंदा और मंदाकिनी नदी किनारे बनाये गये किसी भी उपयोग में नहीं आ रहे हैं। बरसात के बाद से अधिकांश घाट मलबे और रेत के ढेर में तब्दील हो गए हैं। स्थानीय व्यक्ति या फिर कोई भी पर्यटक इन घाटों का रूख नहीं कर रहा है। ऐसे में करोड़ों रूपये की लागत से बनाये गये घाटों की दुर्दशा हो रही है। वहीं रुद्रप्रयाग नगपालिका के पास प्रत्येक वर्ष इन घाटों की सफाई करने के लिये धनराशि नहीं है। ऐसे में पालिका ने शासन को इस संबंध में अवगत कराया है और 60 लाख की डिमांड की है।
दरअसल, वर्ष 2017 में नमामि गंगे योजना के तहत रुद्रप्रयाग में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिये अलकनंदा एवं मंदाकिनी नदी किनारे करोड़ों रूपये की लागत से घाटों का निर्माण किया गया था। घाट नदी से सटकर बनाये गये हैं। ऐसे में बरसाती सीजन में यह घाट जलमग्न हो जाते हैं। पूरे दो से तीन माह तक ये घाट नदी में डूबे रहते हैं। नदी का पानी कम होने के बाद इन घाटों में रेत और मलबा जमा हो जाता है। इस रेत और मलबे को कई महीनों तक साफ नहीं किया जाता है। जिस कारण कोई भी पर्यटक, यात्री और या फिर स्थानीय लोग इन घाटों का रूख नहीं करते हैं। घाटों के निर्माण पर करोड़ों रूपये की राशि खर्च की गई है, लेकिन ये घाट किसी भी उपयोग में नहीं आ रहे हैं। तीन माह घाट पानी में और बाकी समय घाट रेत के ढेर में दबे रह जाते हैं।
नगरपालिका रुद्रप्रयाग के अंडर में अलकनंदा और मंदाकिनी पर बनाये गये पांच घाट हैं, लेकिन पालिका के पास इतना पैंसा नहीं है कि वह प्रत्येक वर्ष बरसात के बाद घाटों में जमा रेत-मलबे को साफ करा सके। नगरपालिका की ईओ सीमा रावत का कहना है कि प्रत्येक वर्ष घाटों में बरसात के बाद मलबा और रेत जमा हो जाती है। पालिका के पास इतनी धनराशि नहीं है कि इसे साफ कराया जा सके। घाटों की सफाई के लिये शासन को स्टीमेट बनाकर भेजा गया है। अगर शासन से धनराशि मिलती है तो मलबे को साफ किया जायेगा।

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