राम मन्दिर होगा और विशाल, पीएम का इंतजार

राम मन्दिर होगा और विशाल, पीएम का इंतजार
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नई दिल्ली।

राम मंदिर का भूमि पूजन 5 अगस्त को तय माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दो तारीख सुझाव के तौर पर दी गई थी। 3 और 5 अगस्त सुझाव के तौर पर दिया गया था। 5 तारीख को ज्यादा संभावना मानी जा रही है ।

पीएम के अलावा यह भी दिग्गज आएंगे

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट  की ओर से भूमि पूजन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, उमा भारती, विनय कटियार और साध्वी ऋतंभरा को भी आमंत्रित किया गया है।

मोदी सरकार की भी कोशिश है कि मंदिर बहुत ज्यादा भव्य बने। अयोध्या को अब मोदी का इंतजार है। पीएमओ से संकेत भी आ रहे हैं कि प्रधानमंत्री जरूर जाएंगे।

राम मंदिर का भूमि-पूजन अभिजीत मुहूर्त में ‘सर्वार्थ सिद्धि योग’ किया जाएगा. ताम्र कलश में गंगाजल और अन्य तीर्थों का जल लाकर पूजा की जाएगी। भूमि पूजन के दौरान 40 किलो चांदी की श्री राम शीला का पूजन होगा। सबकी निगाहें अयोध्या पर टिकी हुई है।

ऐसा होगा मन्दिर जिसकी कल्पना भी नहीं की हो

सबसे बड़ा सवाल है कि राम मंदिर कैसा होगा। राम मंदिर अब दो नहीं बल्कि 3 मंजिल का होगा। लंबाई 280 से 300 फीट, चौड़ाई 270 से 280 फीट और ऊंचाई 161 फीट होगी। लंबाई चौड़ाई और ऊंचाई पहले कम थी लेकिन 18 जुलाई को ट्रस्ट की बैठक में मंदिर को और विशाल और भव्य बनाने पर विचार हुआ। लिहाजा मंजिल दो से तीन मंजिल बढ़ाने और मंदिर का आकार और क्षेत्र भी बढ़ाने का फैसला किया गया। हालांकि मन्दिर के मूल लक्ष्य में कोई बदलाव नहीं होगा।

भूमि पूजन पर सियासत

मंदिर को लेकर सियासत भी जारी है। सत्ता के गलियारों से सवाल भी उठ रहे हैं। पूर्व कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा है कि कुछ लोग सोचते हैं कि राम मंदिर बनाने से कोरोना खत्म हो जाएगा। भूमि पूजन तब शुरू होना चाहिए था जब कोरोना खत्म हो जाता।

भाजपा ने इसे लेकर आपत्ति जताई है। भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि पवार साहब का मन्दिर को कोरोना से जोड़ना बिल्कुल गलत बात है। कांग्रेस नेता हुसैन दिलवाई ने कहा है कि ऐसे आयोजनों में प्रधानमंत्री का जाना सही नहीं है l, जवाहरलाल नेहरू ने सोमनाथ मन्दिर के कार्यक्रम में जाने से इनकार किया था क्योंकि वह एक समुदाय नहीं बल्कि पूरे देश के प्रधानमंत्री थे।

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