शिक्षा सचिव बोले अंग्रेजी स्कूलों को भी पहली कक्षा से मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाना होगा

शिक्षा सचिव बोले अंग्रेजी स्कूलों को भी पहली कक्षा से मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाना होगा
0 0
Read Time:4 Minute, 15 Second

शिक्षा सचिव बोले अंग्रेजी स्कूलों को भी पहली कक्षा से मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाना होगा

निजी स्कूलों ने कहा, बच्चों का होगा नुकसान, सरकार करे पुनर्विचार

नई दिल्ली।

नई शिक्षा नीति में कक्षा 1 से लेकर पांचवी तक मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाने का प्रस्ताव नया विवाद बनता दिख रहा है। मानव संसाधन मंत्रालय जिसका नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है उसके सचिव अमित खरे ने कहा है कि प्राइवेट स्कूलों को भी इस प्रस्ताव को लागू करना होगा और ऐसा नहीं है कि सिर्फ सरकारी स्कूल है इसे लागू करेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य को यह प्रस्ताव लागू कराना होगा और केंद्र सरकार के साथ मिलकर इसे लागू किया जाएगा।

उधर निजी स्कूलों ने सरकार के इस प्रस्ताव का विरोध करना शुरू कर दिया है, उनका कहना है कि पहली कक्षा से पांचवी तक मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा बढ़ाने के प्रस्ताव से गरीब बच्चों को नुकसान होगा क्योंकि अमीर के बच्चे तो अंग्रेजी में निपुण होंगे लेकिन इसका नुकसान गरीबों को होगा सरकार को इस नियम पर पुनर्विचार करना चाहिए।

देश के सबसे बड़े संगठन नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलायंस (NISA) के अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने कहा कि इस प्रस्ताव से सबसे ज्यादा नुकसान माता पिता और उनके बच्चों को होगा। बच्चे को आगे चलकर अंग्रेजी में ही पढ़ना है और अगर पहली से पांचवी तक वह क्षेत्रीय मातृभाषा में पड़ेगा तो उसे आगे चलकर परेशानी होगी। उन्होंने कहा कि कुछ बच्चों के माता-पिता का ट्रांसफर होता और अगर बच्चा हिंदी भाषी राज्य से किसी दक्षिण भारतीय राज्य में जाता है तो उसको सरकार के इस प्रस्ताव की वजह से भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। सरकार को अपने इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करना चाहिए।

हालांकि मोदी सरकार जिस तरह से अपने इस प्रस्ताव पर अड़ी हुई है उसको देख कर लगता है कि भाजपा शासित राज्य केंद्र सरकार के इस प्रस्ताव को लागू करने में गंभीरता दिखा सकते हैं, जबकि विपक्षी दलों की सरकारें इस प्रस्ताव को लेकर लटका सकती है। वहीं जानकारों का कहना है कि प्राइवेट स्कूल की नींव ही अंग्रेजी भाषा पर खड़ी हुई है और इस से उसको सबसे ज्यादा नुकसान होगा इसलिए यह मुद्दा आने वाले दिनों में अदालत में जा सकता है।

सिर्फ निजी स्कूल ही नहीं बल्कि कई अभिभावकों का भी मानना है कि उन्होंने प्राइवेट स्कूल में अपने बच्चे को इतनी महंगी पढ़ाई होने के बावजूद इसलिए दाखिला करवाया ताकि वह अंग्रेजी भाषा में निपुण हो सके और आगे चलकर एक अच्छा कैरियर बना सके क्योंकि भारत में मेडिकल, अदालत इंजीनियरिंग या प्रबंधन का क्षेत्र हो सब जगह अंग्रेजी में ही काम होता है।

निजी स्कूल से जुड़े एक पदाधिकारी ने कहा, जिस तरीके से मोहम्मद तुगलक ने चमड़े के सिक्के चलाए थे उसी तरह मोदी सरकार भी अपनी मर्जी का कर रही है और दबाव में आकर स्कूलों को इसे मानना ही पड़ेगा।

_—————-

Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Social profiles