सचिन और सिंधिया के बाद अब इनका नंबर?

सचिन और सिंधिया के बाद अब इनका नंबर?
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सचिन और सिंधिया के बाद अब इनका नंबर?

कांग्रेस से भाग रहे युवा लीडर

नई दिल्ली।

ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट के मोहभंग होने के बाद कुछ और बड़े युवा नेताओं का कांग्रेस पार्टी से किनारा करने का सिलसिला शायद थमेगा नहीं।

दरअसल पार्टी के अंदर कई ऐसे युवा नेता हैं जो कांग्रेस पार्टी के अंदर घुटन महसूस कर रहे हैं, उनका मानना है कि पार्टी के अंदर 65 साल से ज्यादा नेताओं को खास तवज्जो मिल रही है, बुजुर्गों को ही बड़े पद मिल रहे हैं और युवाओं की आवाज हर प्लेटफार्म पर दबाई जा रही है।

वैसे तो राहुल गांधी भी कांग्रेस के युवाओं नेताओं के लीडर माने जाते हैं लेकिन सिंधिया और पायलट के मामले में वह कुछ नहीं कर पाए।

सिंधिया के जाने के बाद ही राहुल गांधी ने अफसोस जताया जबकि सिंधिया और कांग्रेस के बुजुर्ग नेताओं के बीच की लड़ाई साल भर से चल रही थी।

सिंधिया के जाने के बाद राहुल ने कहा था, ”सिंधिया मेरे साथ कॉलेज में थे। सिंधिया को अपने राजनीतिक भविष्य का डर था उन्होंने अपनी विचारधारा को अपनी जेब में रख दिया और आर एस एस के साथ चले गए लेकिन वास्तविकता है कि वहां पर उन्होंने ना सम्मान मिलेगा और दिल की सच्चाई को भी संतुष्टि नहीं मिलेगी।”

सचिन से वापस आने की अपील पर रास्ते किए बंद

सचिन पायलट और सिंधिया के मामले में एक बात समान है। दोनों के लिए पार्टी के रास्ते खुले होने का दावा तो किया गया लेकिन रास्ते बंद कर दिए गए।

रणदीप सुरजेवाला ने रविवार को कहा, कांग्रेस पार्टी के दरवाजे सचिन पायलट के लिए खुले हुए हैं। लेकिन पार्टी उनको उपमुख्यमंत्री पद और प्रदेश अध्यक्ष पद से पहले ही हटा कर एक्शन ले चुकी है। पायलट के समर्थक विधायकों के खिलाफ भी एक्शन लिया जा चुका है। यह सब उनके धुर विरोधी अशोक गहलोत की देख रेख में हुआ है।

जब सिंधिया ने कांग्रेस पार्टी को छोड़ा था तो उस समय भी कहा गया था कि सचिन पायलट भी कांग्रेस को छोड़ सकते हैं लेकिन हाईकमान ने ध्यान नहीं दिया गया। सचिन पायलट बार-बार कह रहे है कि उनका भाजपा में जाने की कोई योजना नहीं है, लेकिन कांग्रेस को यकीन है कि पायलट भाजपा के साथ मिले हुए हैं और यह उसके खिलाफ साजिश है।

सचिन पायलट और सिंधिया के बाद अभी भी कई युवा नेता कांग्रेस से किनारा कर सकते हैं उनकी एक पूरी लिस्ट है।

जतिन प्रसाद

कुछ ऐसी ही अटकलें सालों से पूर्व केंद्रीय मंत्री और यूपी से नेता जितिन प्रसाद को लेकर लगाई जा रही है। वह पार्टी के प्रति फिलहाल तो निष्ठावान हैं लेकिन वह भी पार्टी के तौर तरीकों से असंतोष दिखाने लगे है। पायलट के मामले में जतिन प्रसाद ने पार्टी के कदम की जमकर मुखालफत की है।

उन्होंने कहा है कि सचिन पायलट मेरे साथी और मित्र है और यह कोई झुठला नहीं सकता कि उन्होंने पार्टी के लिए निष्ठा से काम किया है। मैं आशा करता हूं कि हालात जल्द ठीक हो जाएंगे। असंतोष की आहट दिल्ली में बैठे आलाकमान को महसूस होने लगी है।

दीपेंद्र हुड्डा

हरियाणा से पूर्व सांसद और पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा भी सचिन पायलट सिंधिया जैसे नेताओं की टोली से ही आते हैं और वह भी राहुल गांधी के खास नजदीक माने जाते हैं लेकिन हरियाणा की राजनीति में संगठन के लिए उनकी कोई भूमिका पार्टी ने तय नहीं की है। वह कई बार पार्टी लाइन से अलग राय दे चुके है। मोदी सरकार ने जब 370 हटाई तो उन्होंने खुलकर समर्थन किया था। माना जाता है कि उन्होंने भी सचिन पायलट को मनाने के लिए भी बात की थी।

प्रिया दत्त

कांग्रेसी नेता रहे सुनील दत्त की सियासी विरासत को आगे ले जाने वालीं उनकी बेटी प्रिया दत्त सचिन पायलट को लेकर चल रही खींचतान से बहुत निराश है।

प्रिया दत्त ने कहा, सिंधिया के बाद पायलट ने भी पार्टी छोड़ दी। सचिन भी मेरे साथी थे और पार्टी के निष्ठावान नेता थे। मुझे नहीं लगता कि महत्वाकांक्षी होना बुरी बात है।

आरपीएन सिंह

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस कमेटी की एक मीटिंग में पार्टी के अहम नेता आरपीएन सिंह पहले ही राहुल गांधी के प्रधानमंत्री को लेकर निशाना साधने के तौर तरीकों पर असहमति जता चुके हैं। वह भी सिंधिया और पायलट वाली युवा ब्रिगेड के अहम सदस्य रहे हैं। यूपीए सरकार में वह भी पायलट और सिंधिया की तरह राज्य मंत्री थे। लेकिन हाल के दिनों में वह मोदी सरकार के काम करने के अंदाज से प्रभावित माने जाते हैं। यह बात वह कई बार पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कर चुके हैं।

कुलदीप विश्नोई

हरियाणा में कुलदीप विश्नोई का भी संगठन को लेकर खींचतान आए दिन सुनने को मिलती रहती है। पार्टी के अंदर कई नेताओं का मानना है कि वह भी अपना रास्ता अलग चुन सकते हैं। इससे पहले हरियाणा से ही कांग्रेस के युवा ब्रिगेड के अहम सदस्य माने जाने वाले अशोक तंवर कॉन्ग्रेस कि बुजुर्ग लॉबी से परेशान होकर पार्टी को बाय-बाय कह चुके हैं।

संदीप दीक्षित

दिल्ली की तीन बार मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित को संगठन में कभी पहचान नहीं मिली। वह ऐसी शिकायत कई बार करते रहे हैं।

इसके उलट पार्टी में 65 साल से ऊपर वाले नेताओं का जबरदस्त दबदबा है। युवा शक्ति परेशानी में है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण सचिन और पायलट है।

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