सात सालों से आपदा के साये में जी रहे पुजार गांव के ग्रामीण

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मानसून सीजन में प्रभावित परिवार खतरे के डर से छोड़ देते हैं अपना आशियाना
रुद्रप्रयाग के पुजार गांव के तोणी तोक के पांच परिवारों के घर 2013 की आपदा में हुये क्षे क्षतिग्रस्त
रुद्रप्रयाग। आपदा की दृष्टि से अतिसंवेदनशील जनपद रूद्रप्रयाग में आज भी सैकड़ों परिवार खतरे की जद में होने से विस्थापन की बाट जोह रहे हैं, लेकिन वर्षों गुजर जाने के बाद भी आपदा पीड़ित परिवारों का विस्थापन नहीं हो पाया है। जिस कारण ग्रामीण जीवन और मौत के साये में गुजर-बसर कर रहे हैं और प्रशासन व सरकार की लापरवाही का दंश झेल रहे हैं।
रुद्रप्रयाग जनपद के दूरस्थ पुजार गांव के तोणी तोक के पांच परिवार मौत के साये में जीने को मजबूर हैं। वर्ष 2013 की आपदा में गांव के नीचे से भू-धंसाव हुआ था, जिस पांच परिवारों के घरों में घरों में मोटी-मोटी दरार आ गई थी। तब से लेकर अब तक प्रभावित परिवार विस्थापन की मांग कर रहे हैं, लेकिन विस्थापन नहीं हो पाया है। प्रत्येक मानसून सीजन में ग्रामीण अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण ले लेते हैं। ग्रामीण शासन-प्रशासन से कई बार सुरक्षा की मांग कर चुके हैं, लेकिन कोई उपाय नहीं किये गये हैं।
मोमलाराम, जगदीश भटट सहित अन्य आपदा पीड़ितों का कहना है कि वह वर्षों से विस्थापन और सुरक्षा की मांग कर रहे हैं, लेकिन आज तक उनकी मांग किसी ने नहीं सुनी, जिस कारण वह जीवन व मौत के साये में जीने को मजबूर हैं। बुजुर्गों और बच्चों को सबसे अधिक परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। बरसात के समय तो दिक्कतें अधिक बढ़ जाती हैं। घर बरसात के मौसम में लगातार नीचे धंसते जा रहे हैं। ऐसे में किसी बड़ी दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।

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