सावधान लॉकडाउन में बच्चों को यह क्या हो रहा है?

सावधान लॉकडाउन में बच्चों को यह क्या हो रहा है?
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नई दिल्ली

लॉक डाउन में बड़ी संख्या में लोगों की नौकरी जाने की वजह से आर्थिक तंगी से हालात खराब हो रहे हैं। देशभर में ऐसी कई घटनाएं सामने आ रही है जिसमें लोग परेशान होकर अपनी जान तक दे रहे हैं। परिवार के परिवार बच्चे समेत ऐसा कदम उठाने के लिए मजबूर हो रहे हैं, लेकिन जो दूसरी रिपोर्ट सामने आई है, उससे तो डर और बड़ा हो गया है। अगर सूझबूझ और समझदारी से काम नहीं लिया गया तो स्थिति और खराब हो सकती है।

दरअसल, देश नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में बच्चों द्वारा आत्महत्या करने के मामले में तेजी से बढ़ोतरी आई है। डॉक्टरों का कहना है कि परिवार की जिम्मेदारी के साथ अभिभावकों को बच्चों की भी चिंता करनी पड़ेगी।

केरल के स्टेट क्राईम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार 25 मार्च से 10 जुलाई के लॉक डाउन की अवधि के दौरान 66 बच्चों ने आत्महत्या की, जबकि पिछले पूरे साल में यह आंकड़ा 83 था। वहीं दिल्ली में 12 साल के बच्चे ने घर से बाहर खेलने जाने से मना करने पर 25 मई की रात फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
ऐसे मामले देश के अलग-अलग राज्यों से भी आए हैं। वहीं ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस एचएस की रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन में 56 दिन में 25 बच्चों ने आत्महत्या की है।

बीमार बच्चे बढ़े

सिर्फ आत्महत्या ही नहीं बल्कि बच्चों में मानसिक यानी मेंटल तौर पर परेशानियां बढ़ रही है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स में टेलीमेडिसिन के जरिए रोज औसतन 15 से 20 बच्चों को डॉक्टरों की सलाह दी जा रही है। बच्चों में तनाव घबराहट और बेचैनी बढ़ रही है। दोस्तों से ना मिल पाने से बच्चे अलग-थलग महसूस कर रहे हैं। स्कूल नहीं जाने का भी बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

डॉक्टरों की मानो

डॉक्टरों का कहना है कि पेरेंट्स को बच्चे का व्यवहार अगर अचानक से बदलता है तो सतर्क रहन होगा। बच्चा चुपचाप रहने लगे खाना ना खाए छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ा ने लगे या बहुत अधिक गुस्सा करने लगे तो समझना होगा कि उसके अंदर काफी नकारात्मक यानी नेगेटिव सोच पैदा हो रही है ऐसा लगने पर तुरंत रहना की सलाह ली जाए क्योंकि अगर जरा सी भी लापरवाही होती है तो बच्चों कि जिंदगी भर बुरा असर डालेगी।

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