सांसद तो कुछ पूछ भी लेते हैं लेकिन विधायक नहीं पूछते ज्यादा सवाल देश की विधानसभाओं का हाल

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देश की संसद में सांसदों द्वारा कितने प्रश्न पूछे जाते हैं और वह कितनी बार सदन के अंदर अपने क्षेत्र या देश से जुड़े मुद्दे उठाते हैं इस बात का लेखा जोखा अखबारों में पढ़ने को मिलता रहता है लेकिन देश की विधानसभाओं में किस तरह से काम हो रहा है। विधायक कितने प्रश्न पूछ रहे हैं और किन मुद्दे को उठा रहे हैं इसका लेखा-जोखा बड़े स्तर पर सामने नहीं आता।

इस बारे में जब अध्ययन किया गया तो पता लगा कि विधानसभा में चर्चाएं काफी कम होती हैं। बहुत कम विधायक प्रश्न पूछते हैं और बिल भी थोड़ी बहुत चर्चा के बाद पारित कर दिया जाते हैं। यहां तक कि मंत्रियों के विभाग के बारे में भी लोगों को ठीक से पता नहीं होता।

नीति आयोग के आंकड़े दिखाते हैं कि 17 राज्यों की विधानसभाओं में पूछे गए प्रश्नों में भारी असमानता है। जैसे राजस्थान में सदन के अंदर पूछे जाने वाले तार अंकित प्रशन 11200 हैं जबकि पश्चिम बंगाल में सिर्फ 65 हैं। हालांकि राजस्थान में सिर्फ 21 तारांकित प्रश्नों का जवाब ही विधानसभा के अंदर मिल पाया। ज्यादातर सवाल शिक्षा, स्वास्थ्य और सार्वजनिक निर्माण विभागों, शहरी विकास और आवास से संबंधित थे।

एक रिपोर्ट के मुताबिक कर्नाटक का विधानसभा में कामकाज के मामले में खासतौर से प्रश्न पूछने और विधायकों द्वारा चर्चा में भाग लेने के मुद्दे पर रिकॉर्ड अच्छा है। जैसे कर्नाटक की विधानसभा में 1000 तार अंकित प्रश्न पूछे गए। जून 2017 और 2020 कि अवधि के दौरान। हर विधायक ने औसतन 58 के करीब सवाल पूछे और विधानसभा की कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध करवाई गई जो ऑनलाइन उपलब्ध है इस मामले में कर्नाटक का रिकॉर्ड अच्छा रहा लेकिन सरकार के बिलों को पास कराने के मामले में यह रिकॉर्ड उलट साबित हुआ क्योंकि कुल बिलों में से 92% बिल पेश होने के 1 हफ्ते के अंदर पारित कर दिए गए। इसका मतलब यह हुआ कि बिलों पर सदन के अंदर पर्याप्त चर्चा नहीं हो पाई और हवड़ तवड़ में बिल पास करवाए गए।

2015 में महाराष्ट्र सरकार देश में पहली बार विधायकों को सवाल भेजने और सदन में तेजी से काम के लिए एक ऑनलाइन मंच लॉन्च करने वाली बनी। जून 2017 और जून 2020 के बीच, 22,820 प्रश्न पूछे गए थे, जिसमें से 5,570 प्रश्न थे। इसका मतलब है कि प्रति सदस्य 79.2 प्रश्नों का औसत रहा। पिछली विधानसभा में हालांकि केवल 7 प्रतिशत तारांकित प्रश्नों का मौखिक उत्तर ही मिला था।

नवाचार पर प्रभाव

तेलंगाना विधानसभा में अभी भी अपने शुरुआत चरण में है। तेलंगाना की पहली विधान सभा में सत्र का लगभग 21 प्रतिशत समय प्रश्नकाल पर व्यतीत किया गया, जिसके लिए प्रति दिन 10 तारांकित प्रश्नों का चयन किया गया। इनमें से केवल 38 फीसदी को मौखिक रूप से जवाब दिया गया था।

एक और अपेक्षाकृत नया राज्य, छत्तीसगढ़, नवाचार में सबसे निचले पायदान पर है। 2014 और 2018 के बीच इसकी 4 वीं विधानसभा में केवल 78 विधायकों ने प्रश्न पूछे हैं, जिसके दौरान इसने तीन अविश्वास प्रस्ताव थे। 5 प्रतिशत समय कानून पास कराने पर खर्च किया गया। इसके बावजूद सदन 104 विधेयकों (विनियोग विधेयकों को छोड़कर) को पारित करने में सफल रहा और इनमें से 94 प्रतिशत प्रस्ताव के एक सप्ताह के भीतर पारित कर दिए गए। इसके अतिरिक्त, प्रश्नकाल के लिए चुने गए 25 तारांकित प्रश्नों में से केवल 9 का ही मौखिक रूप से उत्तर दिया गया था। फरवरी-मार्च 2020 सत्र में उठाए गए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों की एक जांच से पता चलता है कि शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए धन सदन में लोकप्रिय विषय हैं।
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