इस जवान पत्रकार की कोरोना से मौत के बाद खड़े हुए कई सवाल कि सब कुछ नॉर्मल करना या कोरोना से नहीं डरना कितना जायज, डब्ल्यूएचओ की राय से मिलेंगे कई जवाब

इस जवान पत्रकार की कोरोना से मौत के बाद खड़े हुए कई सवाल कि सब कुछ नॉर्मल करना या कोरोना से नहीं डरना कितना जायज, डब्ल्यूएचओ की राय से मिलेंगे कई जवाब
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यूपी के लखनऊ में 30 साल के युवा पत्रकार नीलांशु शुक्ला की कोविड-19 से मौत हो गई। निलांशु ने 20 अगस्त को ही खुद के संक्रमित होने की जानकारी टि्वटर हैंडल के जरिए दी थी। उन्होंने बताया था कि उन्हें कोविड-19 से संबंधित कोई भी लक्षण नहीं है और वह खुद को आइसोलेशन में रख रहे हैं। उनके इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने कहा था कि अरे कोरोना और वोरोना कुछ होता नहीं है जल्दी ठीक हो जाओगे चिंता मत करो।

निलांशु बेहद युवा थे और उनकी मौत के बाद सोशल मीडिया में इस बात को लेकर सवाल उठ रहा है कि इतने युवा होते हुए भी उनकी मौत हो गई जबकि 80 साल के कई बुजुर्ग भी इस बीमारी को मात देकर वापस लौटे हैं।

साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि जब देश में सबसे तेज गति से संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं ऐसे में बाजार दफ्तर, परिवहन आदि सबकुछ खोलना कितना ठीक है। कई लोगों का कहना है कि टीवी चैनलों पर कोरोना को कुछ बढ़ा चढ़ा कर दिखाया जाता है जिसकी वजह से लोग दहशत में आ गए हैं और घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं।

लेकिन डब्ल्यूएचओ की ताजा चेतावनी को देखे तो वह कहता है कि बिना हिफाजत और सुरक्षित तरीके से सब कुछ खोलना ठीक नहीं होगा। डब्ल्यूएचओ इस बात को बहुत जोर देकर कहता है कि बिना वायरस को काबू किए अगर आप भीड़ जमा होने वाली जगहो को खोलते हैं तो खतरा बढ़ सकता है।

डब्ल्यूएचओ कहता है कि वह अर्थव्यवस्था को दोबारा खोलने के खिलाफ नहीं है लेकिन वह चाहता है कि सब कुछ हिफाजत के साथ शुरू हो।

डब्ल्यूएचओ धार्मिक स्थल, स्टेडियम, नाइट क्लब खोलने के पक्ष में नहीं

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, WHO ने कहा कि स्टेडियम, नाइट क्लब, धार्मिक स्थान और अन्य भीड़ वाली जगहों के संबंध बड़े पैमाने पर फैले संक्रमण से पाए गए हैं. WHO के डायरेक्टर जनरल टेड्रोस एडहैनम घेब्रियेसुस ने कहा कि लोगों को जमा होने की अनुमति कब और कैसे दी जाए, इसको लेकर फैसला स्थानीय स्तर पर खतरे को ध्यान में रखकर दिया जाना चाहिए.

आसानी से फैलता है वायरस

WHO ने एक बार फिर चेतावनी देते हुए कहा कि कोई भी देश सीधे यह नहीं कह सकता कि अब महामारी खत्म हो गई है. सच्चाई ये है कि यह वायरस आसानी से फैलता है. बिना वायरस पर काबू किए इकोनॉमी और सोसायटी खोलने से त्रासदी की स्थिति पैदा हो सकती है.

WHO के डायरेक्टर जनरल टेड्रोस एडहैनम घेब्रियेसुस ने यह माना कि काफी लोग पाबंदियों से थक चुके हैं और 8 महीने बाद वापस सामान्य हालात में लौटना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि WHO इकोनॉमी और सोसायटी को फिर से खोलने का पूरी तरह समर्थन करता है. हम चाहते हैं कि बच्चे स्कूल जाएं और लोग अपने दफ्तर, लेकिन हम चाहते हैं कि यह सुरक्षित तरीके से हो.

बड़े इवेंट आयोजित ना हो

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि जिन देशों में कोरोना वायरस के एक्टिव केस अधिक हैं वहां ऐसे इवेंट आयोजित नहीं करने चाहिए जिनसे तेजी से संक्रमण फैलने का खतरा हो. सोमवार को WHO ने यह भी कहा कि बिना वायरस पर काबू किए इकोनॉमी-सोसायटी खोलने का मतलब त्रासदी को आमंत्रण देना है।

तो क्या मेट्रो चलाना खतरे से नहीं है खाली

सरकार ने 7 सितंबर से मेट्रो परिचालन की  इजाजत दी है। अब मेट्रो ट्रेन निगम की जिम्मेदारी बनती है कि वह किस तरीके से सुरक्षा के सारे इंतजाम करते हुए लोगों यह सेवा दें। अगर मेट्रो संक्रमण की सारी संभावनाओं को खत्म करता है और सुरक्षा के सारे इंतजाम करता है तो यह काबिले तारीफ होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि मेट्रो को एक मौका देना चाहिए अगर हम मेट्रो को चलाएंगे ही नहीं और डरते रहेंगे कि इससे संक्रमण बढ़ेगा, तो सभी को नुकसान का सामना करना पड़ेगा इसलिए खतरा मोल लेने की जरूरत नहीं है । बस खतरे को कम करके सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ना होगा। विशेषज्ञ कहते हैं कि डब्ल्यूएचओ भी यही बात कह रहा है कि आप अर्थव्यवस्था को खोले लेकिन पूरी हिफाजत के साथ।

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