प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में फर्जीवाड़ा: निजी बीमा कंपनियों ने किसानों से की ठगी…   

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में फर्जीवाड़ा: निजी बीमा कंपनियों ने किसानों से की ठगी…   
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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के सर्वे में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। निजी बीमा कंपनियों के कर्मचारी किसानों से उनका सर्वे बेहतर दिखाने के नाम पर 1 हजार से 70 हजार रुपए ले रहे हैं। आगे ये पैसा ये कर्मचारी बीमा कंपनियों को दे रहे हैं या नहीं ये तो पुलिस जांच के बाद ही साफ हो पाएगा। लेकिन निजी बीमा कंपनी बजाज एलियांज के कर्मचारियों ने किसानों से बेहतर सर्वे के नाम पर पैसे ठगे हैं। कुछ किसानों से पेटीएम व गूगल पे के माध्यम से अपने अकाउंट में रुपए डलवा लिए। इस तरह निजी बीमा कंपनियों ने गरीब किसानों से लाखों रूपये हड़प लिए। अब कृषि विभाग ने जांच के बाद निजी बीमा कंपनियों के कर्मचारियों पर केस दर्ज करवाया है। विभागीय जानकारों का कहना है कि अकेले माजरा गांव से करीब 8 लाख रुपए से अधिक का फ्रॉड किया गया है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत प्रीमियम की राशि का एक छोटा सा हिस्सा किसान को जमा कराना होता है, जबकि प्रीमियम की एक बड़ी राशि केंद्र व राज्य सरकार की ओर से कंपनी को दी जाती है। फसल खराब होने पर कृषि विभाग या कंपनी को 48 घंटे में अवगत कराना होता है। इसके बाद कंपनी के सर्वेयर व ब्लॉक एग्रीकल्चर ऑफिसर की संयुक्त टीम मौके का निरीक्षण करती है कि आखिर किसान की फसल में कितना प्रतिशत नुकसान है। हाल ही में साल्हावास और बेरी ब्लॉक के 1500 के करीब किसानों ने अपनी फसल के पानी में खराब होने की शिकायत दर्ज कराई है। किसानों की फसल खराब होने की शिकायतों पर निजी कंपनी के नुमाइंदे अकेले ही पहुंचे। उन्होंने सर्वे बेहतर दिखाने के नाम पर किसानों से सौदेबाजी करने की कोशिश की। कई मामलों में यह कामयाबी हुए और कुछ में शिकायत होने पर कृषि विभाग का ध्यान गया। जांच में एक किसान ने बताया कि उनसे कंपनी के नुमाइंदों की 70000 में बात हुई है। इसके लिए कंपनी के नुमाइंदों ने 15000 रुपए ले लिए। हालांकि जांच रिपोर्ट में इस किसान का हवाला नहीं है, लेकिन खुड्डन गांव के किसान ने सर्वे के नाम पर 35000 रुपए की मांग किए जाने की बात कही है। जांच टीम ने एक गांव के 10 लोगों से बातचीत की, जिसमें 4 लोगों से पेटीएम के माध्यम से पैसा लिया गया।  जांच में इस बात का भी खुलासा हुआ कि सर्वेयर के रूप में काम करने वाले कंपनी के नुमाइंदों ने फर्जी कृषि अधिकारी बनकर भी किसानों को ठगा है। पहले से नियम यह है कि किसी भी सर्वे में बीमा कंपनी के नुमाइंदों के साथ-साथ उस क्षेत्र का ब्लॉक कृषि अधिकारी भी साथ रहेगा। एक मामले में जब किसान ने ब्लॉक कृषि अधिकारी के बारे में उस सर्वेयर से पूछा तो तब सर्वेयर ने अपने साथ मौजूद एक व्यक्ति को ही कृषि अधिकारी के रूप में दिखाया।

कृषि मंत्री से शिकायत के बाद शहर थाना पुलिस ने दर्ज की एफआईआर

कृषि अधिकारी ने बताया कि किसानों के साथ हुए इस अन्याय के बाद जांच करवाई गई। उसके आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शहर थाने में शिकायत दी, लेकिन वहां से बेरी व साल्हावास क्षेत्र में जाने का सुझाव दिया। डीसी से भी शिकायत की। इसके बावजूद कोई संतोषजनक जवाब थाने से नहीं मिला। 2 दिनों से उच्च अधिकारियों से शिकायत की गई। जब मामला कृषि मंत्री तक पहुंच तो मंगलवार को शहर थाने में शिकायत दर्ज की गई।  
विभागीय सूत्रों के मुताबिक बाजरे की फसल खराब होने पर किसानों को 16000 रुपए मिलते हैं, जबकि कपास के मामले में यह राशि करीब 35 हजार के आसपास है। ऐसे में सर्वे करने वालों ने उनसे मोटी रकम की मांग की। वहीं दूसरी ओर, किसान भी इस लालच में पड़ गए कि शायद सर्वेयर को कुछ पैसा देने के बाद उनको उनकी फसल का अधिक से अधिक पैसा मिल सकता है। दूसरी ओर पिछले कुछ समय में बीमा कंपनियों ने इस योजना से करोड़ों रूपये कमाए हैं। बीमा कंपनियों ने प्रीमियम के तौर पर तो करोड़ों रुपये वसूले लेकिन मुआवजा लाखों से भी कम का दिया। ऐसे में किसानों से भी पैसों की ठगी एक बड़ा मामला है।

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