राइट टू रिकॉल से परेशान हैं हरियाणा के सरपंच..

राइट टू रिकॉल से परेशान हैं हरियाणा के सरपंच..
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कभी महिला अधिकारों के प्रति नकारात्मक रूख रखने वाले हरियाणा प्रदेश में सरकार के पंचायती राज में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देने सरपंचों ने स्वागत किया है। वहीं, प्रदेश सरकार के राइट-टू-रिकॉल के फैसले से सरपंच नाखुश हैं। ज्यादातर सरपंचों ने ग्रामीणों के चाहने पर एक साल बाद सरपंच को पदभार मुक्त करने के फैसले को लोकतंत्र का हनन बताया है। उनका कहना है कि लोकतंत्र के तहत चुनाव जीतकर सरपंच बनते हैं। यह फैसला लागू होने के बाद राजनीतिक द्वेष के चलते सरपंचों को अनर्गल आरोप लगाकर पद से बर्खास्त कराने की साजिशें भी रची जाएंगी। दूसरी ओर पंचायती राज में महिलाओं के 50 प्रतिशत आरक्षण देने पर महिला सरपंचों को कहा कि इससे महिलाओं को उनके हकों का पता चलेगा और समाज में वो भी अपनी विशिष्ट पहचान बना सकेंगी। 

महिलाओं को 50 फीसदी कोटा देना सही कदम
महिलाओं को कोटा देने पर सरपंच सुमन कुमारी ने बताया कि पंचायती राज में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देना सरकार का सही कदम है। इससे महिलाओं को उनके हकों की जानकारी मिलेगी। हालांकि उन्राहोंने भी राइट-टू-रिकॉल का फैसला सही नहीं बताया है। इससे गांव का माहौल खराब होगा। गांव, राज्य और देश का प्रतिनिधित्व करने में सक्षम- महिलाओं को पंचायती राज में 50 फीसदी का कोटा मिलने पर उन्हें आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। महिलाएं अब घर की चाहरदिवारी तक सीमित नहीं है। वो गांव, राज्य और देश का प्रतिनिधित्व करना अच्छे से जानती हैं। डांडमा की सरपंच नीतू शर्मा ने कहा कि राइट-टू-रिकॉल पर सरकार को दोबारा विचार करना चाहिए। महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देने का हम स्वागत करते हैं लेकिन सरकार का राइट-टू-रिकॉल का फैसला सही नहीं है। सरकार को इस फैसले पर पुर्नविचार करना चाहिए। जिले के ज्यादातर सरपंच इस फैसले से नाखुश हैं। साहुवास के सरपंच संदीप ने बताया कि कानून को ध्यान में रखते हुए भी सरपंच को कई फैसले लेने पड़ते हैं जो कुछ ग्रामीणों के खिलाफ भी होते हैं। ऐसे में राइट-टू-रिकॉल का फैसला सही नहीं है।

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