India-China: चीन के संयुक्त राष्ट्र में युद्ध नहीं करने के बात के बाद सीमा पर तनाव कुछ कम हुआ

India-China: चीन के संयुक्त राष्ट्र में युद्ध नहीं करने के बात के बाद सीमा पर तनाव कुछ कम हुआ
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संयुक्त राष्ट्र में चीन के राष्ट्रपति शी जींन के किसी से युद्ध ना लड़ने की बात कहने के बाद भारत और चीन की सीमा पर भी कुछ शांति की उम्मीद बंधी है। दरअसल दुनियाभर में चीन की बदनामी को देखते हुए चीन ने अपने आक्रामक रवैये को बदला है और इसी वजह से भारत के पूर्वी लद्दाख हिस्से में तनाव को खत्म करने की ओर कोशिशें चल रही हैं।
संयुक्त राष्ट्र की बैठक में चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि हमारी नीयत किसी भी देश से ना ही शीत युद्ध लड़ने की है न ही किसी प्रकार के युद्ध लड़ने की है। इसके बाद ही ये लगने लगा था कि भारत के साथ भी चीन तनाव करने के लिए कुछ झुकेगा और वैसा ही हुआ। चीन ने भारत के साथ बैठक में तय किया कि दोनों देश सीमा पर और ज्य़ादा सैनिक जमा नहीं करेंगे। अभी तक चीन किसी भी बात के लिए तैयार नहीं हो रहा था। सोमवार को दोनों देशों के बीच तकरीबन 14 घंटे तक चली कमांडर स्तरीय वार्ता में बनी। 10 सितंबर को दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की मास्को में हुई बातचीत में पांच मुद्दों पर सहमति के बाद यह कमांडर स्तर पर ये पहली वार्ता थी। दोनों पक्षों ने संयुक्त बयान जारी कर इसकी जानकारी दी है, जो इस बात को बताता है कि माहौल में कुछ सुधार हुआ है।
संयुक्त बयान के मुताबिक भारत व चीन के बीच सैन्य कमांडर स्तर की छठे दौर की बातचीत हुई है। दोनों पक्षों में खुले माहौल में और एलएसी पर हालात को स्थिर बनाने को लेकर बहुत ही गहराई से विचारों का आदान-प्रदान हुआ। संयुक्त बयान में उन बातों का जिक्र है जिसको लेकर सहमति बनी है। ये हैं ग्राउंड यानी विवाद वाली जगह पर संवाद को बढ़ाना, एक-दूसरे को लेकर गलतफहमी दूर रहना, फ्रंटलाइन (सीमा) पर और सैनिकों की तैनाती को रोकना, ग्राउंड पर यथास्थिति बदलने से रोकना। दोनों पक्ष कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाएंगे जिससे मौजूदा हालात और पेचीदा हो जाएं। इसमें आगे कहा गया है कि जितनी जल्द हो सके सैन्य कमांडरों के बीच 7वें दौर की बातचीत होगी ताकि एलएसी पर जो समस्या पैदा हुई है उसका समाधान हो
इससे पहले भी विदेश मंत्री एस. जयशंकर व चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच बनी पांच बिंदुओं पर सहमति बनी थी। जिसपर अब सैन्य स्तर की बातचीत चल रही है। हालांकि चीन की किसी बात पर आंख बंद कर भरोसा करना ठीक नहीं माना जा रहा है। बातचीत के बावजूद सेना अपनी तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती है।

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