Kargil Victory: ऑपरेशन विजय जिसमें भारतीय जांबाजों ने पाकिस्तान को बता दी उसकी औकात, पाकिस्तानी सेना ने धोखे से किया था कारगिल पर कब्जा

Kargil Victory: ऑपरेशन विजय जिसमें भारतीय जांबाजों ने पाकिस्तान को बता दी उसकी औकात, पाकिस्तानी सेना ने धोखे से किया था कारगिल पर कब्जा
0 0
Read Time:5 Minute, 20 Second

Kargil Victory: आज यानी 26 जुलाई को देश का हर नागरिक कारगिल में भारतीय वीरों की वीरता का जश्न मना रहा है। पाकिस्तान को उजाड़ने वाली भारतीय सेना की इस कार्रवाई को ‘ऑपरेशन विजय’ के नाम से भी जाना जाता है। अगर हम संक्षेप में समझें तो पाकिस्तान के छल-कपट से शुरू हुए इस युद्ध का भारतीय सैनिकों ने बहादुरी और जीत के साथ अंत किया था।

आपको मालूम होगा कि देश के विभाजन से पहले कारगिल लद्दाख की एक तहसील थी, जहां विभिन्न भाषाओं, जातीय और धार्मिक समूहों के लोग विभिन्न घाटियों में रहते थे। अब 1947-18 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ और नियंत्रण रेखा अस्तित्व में आई। अब इस लाइन के कारण लद्दाख जिले का विभाजन हो गया और स्कार्दू तहसील पाकिस्तान का हिस्सा बन गई। दोनों देशों के बीच सशस्त्र संघर्ष का दौर यहीं खत्म नहीं हुआ। 1971 में फिर से सशस्त्र संघर्ष हुआ और बाद में शिमला समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसके जरिए वादा किया गया था कि दोनों देश सीमा को लेकर नहीं लड़ेंगे। हालांकि, संघर्ष का दौर थम नहीं रहा था, क्योंकि दोनों देश सैन्य चौकियों के माध्यम से सियाचिन ग्लेशियर को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे थे।

कश्मीरी आतंकियों को पाकिस्तान ने दिया था समर्थन

इसके बाद अलगाववादियों की वजह से साल 1990 में कश्मीर में तनाव और बढ़ गया। बताया जा रहा है कि इनमें से कुछ को पाकिस्तान का समर्थन मिल रहा है। इसके बाद दोनों देशों ने 1999 में फिर से द्विपक्षीय शांति के लिए लाहौर घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए, लेकिन पाकिस्तान ने अपनी हरकतों को नहीं रोका। पाकिस्तानी सेना गुपचुप तरीके से सैनिकों और अर्धसैनिक बलों को प्रशिक्षण दे रही थी और उन्हें भारतीय क्षेत्र में भेज रही थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनमें से कुछ मुजाहिदीन के वेश में भारत में घुसे थे।

क्या था मकसद

कहा जाता है कि वे कश्मीर और लद्दाख के बीच की कड़ी को तोड़ना चाहते थे और भारतीय सेना को सियाचिन ग्लेशियर से पीछे हटने के लिए मजबूर करना चाहते थे। ऐसे में अगर तब उनकी योजनाएं सफल होतीं तो भारत को कश्मीर विवाद पर बातचीत करनी पड़ती। हालांकि देश की सेना ने भी भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ का मुंहतोड़ जवाब दिया और युद्ध जीत लिया।

कैसा रहा कारगिल युद्ध का परिणाम

दरअसल, साल 1999 में पाकिस्तान से आए घुसपैठियों के खिलाफ कारगिल युद्ध लड़ा गया था, जिन्होंने नियंत्रण रेखा पार कर 1998 में भारतीय क्षेत्र में प्रवेश किया था। जब भारतीय सेना को पाकिस्तान की योजना के बारे में पता चला तो सेना ने तुरंत कार्रवाई की और कुछ ही देर में 2 लाख भारतीय सैनिक पहुंच गए। अब जब युद्ध शुरू हुआ तो पहले से ही ऊंचाई पर जगह मिलने के कारण पाकिस्तान को फायदा मिला। उनके लिए भारतीय सैनिकों पर गोली चलाना आसान हो गया। पाकिस्तान ने दो भारतीय लड़ाकू विमानों को नष्ट कर दिया और एक अन्य दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने पाकिस्तान से एलओसी से अपनी सेना वापस बुलाने के लिए कहा था, तो पाकिस्तान ने अमेरिकी हस्तक्षेप की मांग की थी।

527 भारतीय सैनिक हुए थे शहीद

इसके बाद, जब पाकिस्तान अपनी सेना को वापस बुलाने में व्यस्त था, भारतीय सेना ने शेष पाकिस्तानी चौकियों पर हमला किया और ऊंचाइयों पर नियंत्रण हासिल कर लिया। 26 जुलाई तक, सेना ने मिशन को पूरा कर लिया। इस दौरान 527 जवान शहीद हो गए। जबकि, पाकिस्तान की तरफ से 700 मौतें दर्ज की गई थीं।

Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Social profiles