जेएनयू जामिया के छात्र नहीं नीट जेईई के परिक्षार्थी मोदी सरकार के बड़े वोटर, विपक्ष छीनने की कोशिश में

जेएनयू जामिया के छात्र नहीं नीट जेईई के परिक्षार्थी मोदी सरकार के बड़े वोटर, विपक्ष छीनने की कोशिश में
0 0
Read Time:6 Minute, 32 Second

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सबसे बड़ा समर्थक देश का युवा मतदाता माना जाता है। मोदी सरकार जेईई और नीट संयुक्त प्रवेश परीक्षा तय तारीख पर करवाने को लेकर अड़ गई है। दूसरी तरफ इस मुद्दे को लेकर विपक्ष इन युवाओं की आवाज बनने की कोशिश में जुट गया है।

भाजपा के लिए युवा मतदाता सबसे बड़ा वफादार मतदाता हैं जो किसी भी सूरत में पिछले 7 साल से राष्ट्रीय मुद्दों पर उसके साथ टिका हुआ है।

विपक्ष शायद इसी कारण से इस मौके को बहुत बड़ा मान रहा है क्योंकि वह जानता है कि ये छात्र जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) या जामिया मिलिया इस्लामिया जैसे संस्थानों से नहीं आते हैं, जिन्हें भाजपा देश-विरोधी और टुकड़े टुकड़े गिरोह के रूप में वर्गीकृत करना आसान समझती है।जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) या जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों से पार्टी को कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि वे इसके वोटर नहीं हैं।

वहीं परीक्षा का विरोध करने वाले छात्र जो कॉलेज में प्रवेश करने वाले हैं कोई एक विशेष विचारधारा के अनुरूप नहीं हैं और इसलिए उन्हें कोई एक विचारधारा से लेबल करना मुश्किल है। ये युवा विभिन्न लिंग, जाति और वर्ग में मिश्रित है। दिल्ली के वामपंथी गढ़ JNU के छात्रों की तरह नहीं यह युवा भाजपा के चुनावी अंकगणित के लिए मायने रखते हैं।

छात्रों का गुस्सा ऑनलाइन प्लेटफार्म पर कुछ वास्तविक और कुछ ऑर्केस्ट्रेटेड यानी प्रायोजित दिख रहा है। प्रधान मंत्री मोदी ने मन की बात के नवीनतम एपिसोड में छात्रों और उनकी चिंताओं को संबोधित नहीं किया था, जिसके बाद इस शो को लेकर भाजपा के विभिन्न यूट्यूब चैनलों पर ‘ नापसंद ’ करने वालों की भारी संख्या देखी गई।सोशल मीडिया पर #StudentsDislikePMModi ट्रेंड करने लगा।

मोदी और युवा मतदाता

जब से 2014 में भाजपा का राष्ट्रीय उदय शुरू हुआ, नरेंद्र मोदी भारत के युवा मतदाताओं के बीच एक हिट रहे हैं, जो उन्हें अपील करने वाली भाषा में बोलते हैं और ऐसा संदेश देते हैं जो उनकी आकांक्षाओं को पूरा करता है। वे उसकी चुनावी महत्वाकांक्षाओं का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन गए हैं।

उत्तर प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश से लेकर असम और त्रिपुरा तक के पिछले चुनावों में पहली बार के युवा और युवा मतदाताओं के बीच मोदी की लोकप्रियता काफी हद तक शहरी-ग्रामीण में भाजपा के लिए फायदेमंद रही।

यह युवा प्रधानमंत्री को विकस पुरुष के रूप में देखते हैं। देश में नोटबंदी के सबसे बड़े समर्थकों में यह युवा थे। पीएम मोदी इस बात से अवगत हैं कि यह मतदाता कितना महत्वपूर्ण है।

निश्चित रूप से, यह पहली बार नहीं है जब मोदी सरकार ने युवा मतदाता का विरोध किया है। हालांकि, अंतर यह है कि जिस युवा ने पहले उनका विरोध किया था, वे जेएनयू या जामिया से था। भाजपा ने इस विरोध को राष्ट्र विरोधी के रूप में जनता के सामने पेश करने में कामयाबी पाई और विपक्ष ने जब इस विरोध का साथ दिया तो भाजपा ने उन्हें भी इस श्रेणी में खड़ा कर दिया।

इस बार, हालांकि, हालात अलग लग रहे हैं और विपक्ष इस छात्र संकट में एक अवसर को सूँघने की कोशिश कर रहा है।

विपक्ष का चौका

2018 में भारत की औसत आयु 27.9 वर्ष थी। जहां युवा तेजी से एक शक्तिशाली चुनावी क्षेत्र बन रहे हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए, भारत के चुनाव आयोग ने कहा था कि लगभग 8.4 करोड़ पहली बार मतदाताओं ने अपने वोट डाले, इन पर राजनीतिक दलों की नजर है।

जेईई-नीट संकट के साथ, विपक्ष अपने कुछ खोए हुए आधार को फिर से हासिल करने की कोशिश में एक शॉट ले सकता है, अगर वह अपने पत्ते अच्छी तरह से खेले।

विपक्षी दल इसे महसूस करते हैं और अभी के लिए आश्चर्यजनक रूप से एकजुट हैं।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर ‘ परीक्षा पर चर्चा ’ और खिलौने पर चर्चा ’ के तंज के साथ हमला किया।

क्या विपक्ष इस बार कामयाब हो पाएगा या फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके सिपहसालार गृह मंत्री अमित शाह दूसरे मुद्दों के बल पर विपक्ष को एक बार फिर कमजोर साबित करेंगे यह सारे सवालों का जवाब आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा के प्रदर्शन को देखने के बाद मिलेगा।

लोकसभा चुनाव चार साल दूर हैं। हो सकता है कि इन 4 सालों में युवाओं का गुस्सा खत्म हो जाए और वह फिर मोदी सरकार के बड़े पहन के रूप में शामिल हो या फिर विपक्ष इस गुस्से को प्रकार रखता है और भाजपा को नुकसान पहुंचाने में कामयाब होता है।

,——-

Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Social profiles