निजीकरण के विरोध में रेलवे का होगा चक्का जाम

निजीकरण के विरोध में रेलवे का होगा चक्का जाम
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रेल मंत्रालय के मालढुलाई के लिए निजी कंपनियों को ट्रेन चलाने के लिए देना रेल कर्मचारियों की यूनियन को नहीं भा रहा है। कंटेनर कॉरपोरेशन के अधिकार क्षेत्र में चलने वाली ट्रेनें अब प्राइवेट कंपनियां चलाएंगी। इसको लेकर रेलवे अधिकारी और कर्मचारियों की यूनियन लंबी लड़ाई की तैयारियां कर रही है। रेलवे के कंटेनर गाड़ियां निजी हाथों में देने के फैसले के खिलाफ ऑल इंडिया रेलवेमैन फेडरेशन ने आंदोलन शुरू कर दिया है। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर एक प्रदर्शन कार्यक्रम में फेडरेशन के अध्यक्ष शिव गोपाल मिश्रा ने कहा अगर सरकार ने इसे नहीं रोका तो वो रेलवे का चक्का जाम कर देंगे।
दरअसल रेल मंत्रालय ने करीब 151 ऐसे रूट्स की पहचान की है, जिनपर निजी कंपनियां ट्रेन चला सकती हैं। चूंकि इसमें काफी बड़ा इवेस्टमेंट होना है। जोकि रेलवे नहीं कर पा रहा है। ऐसी स्थिति में निजी कंपनियां ये निवेश करेंगी और इन रूट्स पर अगले 35 सालों तक गाड़ियां चलांएगी। पैसेंजर गाड़ियों में भी हाल ही में सरकार ने कुछ रूट्स आईआरसीटीसी को दिए हैं। चूंकि आईआरसीटीसी रेलवे की ही पीएसयू है। इसलिए इसपर रेलवे यूनियन ने इसपर ज्य़ादा कुछ नही कहा था। लेकिन अब सीधे सीधे निजी कंपनियों को मालढुलाई का संचालन देने से रेलवे यूनियन काफी परेशान हैं।
अपने प्रदर्शन में बोलते हुए शिव गोपाल मिश्रा ने कहा कि जिस तरह से रेलवे को निजी कंपनियों को बेचा जा रहा है। उसको रेलवे के लोग किसी भी कीमत पर नहीं होने देंगे। चाहे इसके लिए हमें रेलवे का चक्का जाम ही क्यों ना करना पड़ जाए। उन्होंने कहा कि जो रेलवे का अधिकारी कर्मचारी जहां भी है। उसको वहीं पर इसका विरोध करना चाहिए।

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