कफील खान को प्रियंका का समर्थन मुस्लिमो से बनी दूरी को पाटने की रणनीति

कफील खान को प्रियंका का समर्थन मुस्लिमो से बनी दूरी को पाटने की रणनीति
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नई दिल्ली: गोरखपुर के डॉक्टर कफील खान के लिए प्रियंका गांधी वाड्रा का कथित समर्थन कांग्रेस पार्टी द्वारा आगामी चुनावों में उत्तर प्रदेश के मुसलमानों के लिए खुद को बड़े विकल्प के रूप में पेश करने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है।

प्रियंका की टीम ने खान की रिहाई की मांग करते हुए अभियान चला रही हैं और पिछले हफ्ते जेल से रिहा होने के बाद उन्हें राजस्थान ले जाया गया। उन्हें और उनके परिवार को उस राज्य में कांग्रेस सरकार के तहत सुरक्षा का आश्वासन दिया गया।

इससे पहले कांग्रेस ने खान की रिहाई की मांग को लेकर यूपी के विभिन्न जिलों में 15 दिन का अभियान चलाया था। हस्ताक्षर अभियान, भूख हड़ताल, दरगाह के दौरे और कफील खान के नाम पर रक्तदान कैंप करवाए गए थे।

प्रियंका ने खुद सार्वजनिक तौर पर खुलकर खान की गिरफ्तारी के खिलाफ ध्यान दिए थे और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी चिट्ठी भी लिखी थी।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पिछले दिसंबर में नागरिकता विरोधी (संशोधन) अधिनियम के विरोध में किए गए एक कथित भड़काऊ भाषण के लिए 29 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था।

बीते मंगलवार देर रात मथुरा जिला जेल से रिहा कर दिया गया था। कुछ दिनों बाद, उन्हें कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत आरोपित किया गया, लेकिन इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उनकी गिरफ्तारी को “अवैध” माना।

नेताओं और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जब यूपी की योगी सरकार मुस्लिम वोटरों से दूरी बनाने की कोशिश कर रही है ऐसे में किसी मुस्लिम शख्सियत के साथ खड़ा होकर कांग्रेस मुस्लिम वर्ग की पैरोकार बन रही है।

प्रियंका की रणनीति

यूपी कांग्रेस अल्पसंख्यक सेल के प्रमुख शाहनवाज आलम ने कहा कि कफील खान को पार्टी का समर्थन और सहायता “प्रियंका गांधी के निर्देशों के तहत किया गया है”।

“लेकिन कफील अकेले मुस्लिम व्यक्ति नहीं है जिसे आदित्यनाथ सरकार द्वारा लक्षित किया जा रहा है।’ आलम ने कहा कि राज्य भर के मुस्लिम कार्यकर्ताओं और विचारकों को जेल में डाला जा रहा है। “सीएए-एनआरसी को लागू करने से संविधान के मूल तत्व जो मुसलमानों की सुरक्षा करते हैं, वे खतरे में हैं। यही कारण है कि इस मुद्दे को उठाना हमारे लिए महत्वपूर्ण हो गया। ”

यूपी में विधानसभा चुनाव 2022 में है। उससे पहले साल के अंत में कम से कम 8 सीटों पर उपचुनाव होंगे।

दिसंबर में नागरिकता विरोधी संशोधन अधिनियम के विरोध को लेकर उपद्रव में कई हत्या हुई थी। इसके बाद प्रियंका ने मृतकों के परिवारों से मिलने के लिए विभिन्न यूपी के जिलों में कई दौरे किए । जनवरी में वह फिर से आईं और सीएए विरोध प्रदर्शनों के साथ एकजुटता व्यक्त की।
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