#RepublicDay: जानिए क्यों दी जाती है 21 तोपों की सलामी

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देश के संविधान को आज 72वां साल हो गए हैं, देश आज गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस मौके पर राजपथ पर ऐतिहासिक परेड निकलेगी, जिसमें देश की सैन्य ताकत और सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन होगा। कोरोना के कारण इस बार परेड में काफी बदलाव है। इसका कुल तयशुदा रास्ता कम कर दिया गया है। इस बार परेड नेशनल स्टेडियम पर ही समाप्त हो जाएगी।

क्यों दे जाती है 21 तोप की सलामी

दरअसल हर साल गणतंत्र दिवस की परेड 10 बजकर 18 मिनट पर शुरू होती है और 10:31 मिनट पर 21 तोपों की सलामी होती है, क्योंकि 1950 में भारत को 10 बजकर 18 मिनट पर प्रभूता संपन्न घोषित किया गया था। इसके बाद देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी और इसकी सूचना पूरे देश को 10:30 बजे 31 तोपों की सलामी के साथ दी गई। इसी वजह से हर साल परेड में 21 तोपों की सलामी दी जाती है। तभी से ये परंपरा निभाई जा रही है।

क्या होगा परेड में

इस बार परेड में पहली बार राफेल लड़ाकू विमान शामिल होगा। साथ ही बांग्लादेश सैन्य बल की 122 सदस्यीय टुकड़ी भी राजपथ पर परेड करती नज़र आएगी।

यह टुकड़ी बांग्लादेश के मुक्तिवाहिनी के योद्धाओं की विरासत को आगे बढ़ाएगी, इस वाहिनी ने वहां हो रहे दमन व अत्याचार के खिलाफ बांग्लादेश को 1971 में आजादी दिलाई थी। 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर जीत के उपलक्ष्य में स्वर्णिम विजय वर्ष मना रहा है। इस युद्ध के बाद ही बांग्लादेश अस्तित्व में आया था। परेड के दौरान थल सेना की ब्रह्मोस मिसाइल की मोबाइल प्रक्षेपण प्रणाली, जंगी टैंक टी-90 भीष्म, इनफैन्ट्री कॉम्बैट वाहन बीएमपी-दो सरथ और रॉकेट सिस्टम पिनाका समेत अन्य अनेक हथियार दिखाएं जाएंगे। नौसेना आइएनएस विक्रांत और 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान नौसैन्य अभियान की झांकी प्रस्तुत करेगी। वायुसेना भारत में स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस और टैंक रोधी मिसाइल ध्रुवास्त्र को प्रदर्शित करेगी। राफेल के अलावा वायु सेना के 38 और थल सेना के चार विमान परेड में हिस्सा लेंगे।

कोरोना के मद्देनजर शारीरिक दूरी के नियमों का पालन सुनिश्चित किया गया है। थर्मल स्क्रीनिंग, सैनिटाइजर और फेस मास्क की भी व्यवस्था की गई है। इसके चलते केवल 25,000 लोगों को राजपथ पर समारोह देखने के लिए आने की अनुमति दी गई है। आम तौर पर हर साल होने वाले इस आयोजन में एक लाख से अधिक दर्शक शामिल होते हैं। इस साल परेड भी छोटी होगी। लाल किले तक मार्च करने के बजाय राष्ट्रीय स्टेडियम में परेड समाप्त होगी। लाल किले तक केवल झांकियों के जाने की अनुमति होगी। मोटरसाइकिल स्टंट भी देखने को नहीं मिलेगा।

 

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